स्टेन्स हत्याकांड: 26 साल बाद दारा सिंह की रिहाई की अटकलें तेज
Rourkela (ରାଉରକେଲା)रिपोर्टर: संदीप कुमार अग्रवाल, राउरकेलाJuly 17, 2026236 views

ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों फिलिप तथा टिमोथी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। करीब 26 वर्षों से जेल में बंद दारा सिंह की रिहाई से संबंधित प्रक्रिया को 15 अगस्त तक पूरा करने की समयसीमा तय किए जाने के बाद इस मामले ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
दारा सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने राज्य सरकार को रिहाई प्रक्रिया निर्धारित समय के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया। दारा सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए.पी. सिंह ने पैरवी की। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि वर्ष 1999 में ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों को वाहन समेत जिंदा जला दिया गया था। इस जघन्य हत्याकांड ने देश-विदेश में व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की थी।
मामले में दारा सिंह को पहले मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। वर्तमान में दारा सिंह केंदुझर जिला जेल में बंद है और वह 26 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार की ओर से बताया गया कि राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने जेल में दारा सिंह के अच्छे आचरण और निर्धारित नियमों के आधार पर उसकी समयपूर्व रिहाई की सिफारिश की है। केंदुझर जेल प्रशासन की अनुशंसा के बाद जेल महानिदेशक ने भी रिहाई का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। आवश्यक सत्यापन और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिहाई पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि, इस संभावित रिहाई ने एक बार फिर न्याय, दंड और सुधार के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। एक पक्ष का मानना है कि लंबी अवधि तक सजा काट चुके और जेल में अच्छा आचरण रखने वाले कैदियों को कानून के तहत समयपूर्व रिहाई का लाभ मिलना चाहिए। वहीं दूसरा पक्ष इस जघन्य अपराध की गंभीरता, पीड़ित परिवार की पीड़ा और न्याय की भावना को देखते हुए ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है।
अब सभी की निगाहें 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और राज्य सरकार की अंतिम कार्रवाई पर टिकी हैं।
